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मानव योनि एक चौराहा य़ा चार-रस्ता

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ब्रह्माण्ड में मानव शरीर को अति मूल्यवान माना गया है ।  मानव योनि वास्तव में एक ऐसा योनि है ज़िसे चौराहा य़ा चार-रस्ता  कहा जा सकता है, जहाँ से एक मार्ग संसार की ओर ज़िसमे दूसरी समस्त योनियो मे जाया जा सकता है, दूसरा मार्ग स्वर्ग की ओर ,तीसरा मार्ग नर्क की ओर और चौथा मार्ग जाता है मोक्ष की ओर।  मोक्ष का अर्थ है जीते-जी ही कारण शरीर मे उपस्थित सभी दमित  समस्त इच्छाओं व तृष्णाओं से मुक्ती .  जीते जी ही जीव की जैसी आत्मिक स्थिती रहती है तो उसके द्वारा शरीर त्यागने के बाद भी वही स्थिती रहती है. इसिलिये मोक्ष जीते जी ही प्राप्त करना करूरी है.     परमात्मा द्वारा आदेशित कर्मो को न करने से ही जीव का  अनंत कालचक्रों मे आवागमन होता रहता है, यहीं से शुरू हो जाता है बार-बार जन्म और बार -बार मृत्यु का क्रम भी। जैसे कि किसी ने किसी देवी-देवता य़ा परमात्मा य़ा उसकी किसी भी शक्ती का अनुष्ठान किया तो अनुष्ठान के फलस्वरूप यदि कोई   कोई आशीर्वाद स्वरूप आदेशित किया गया है और वो नहीं किया गया तो सम्बंधित को कालचक्र मे फंसना पड़ जाता है, फिर अनंत कर्मो...

“देवबन्द” को कब “पिशाचबन्द” बनायेंगे?

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“देवबन्द” को कब “पिशाचबन्द” बनायेंगे?by Vinay Jha  योगी जी दूसरे स्थानों का नाम बदलते हैं,“देवबन्द” को कब “पिशाचबन्द” बनायेंगे? देवबन्द सम्मेलन में मदन−वंश के मदनी ने संसद के कानून को अमान्य करके शरीयत के अनुसार तलाक की घोषणा की है,यह जानते हुए कि “३−तलाक” पैगम्बर की मृत्यु के पश्चात बनाया युद्धकालीन मार्शल लॉ था । मुल्लों को भ्रम हो गया है कि वे भारत को ईस्लामी देश बना सकते हैं । जिनकी ऐसी ईच्छा थी वे पाकिस्तान चले गये,बचे खुचे अब भी जा सकते हैं । हिन्दू के साथ नहीं रह सकते — यही कहकर जिनलोगों ने देश को तोड़कर पाकिस्तान लिया,आज उनके धर्मगुरु मुल्ला मदनी कह रहा है कि जिनको मुसलमानों का ३−तलाक पसन्द नहीं वे भारत छोड़ दें! असत् उद् दीन ओवैसी ने अपने हिन्दू पूर्वजों को नकारकर कल ही घोषणा की है कि उसके पूर्वज अब्रामिक नस्लों के पूर्वज आदम थे !आज ओवैसी के परपरदादा ब्राह्मण “तुलसी राम दास” की आत्मा रो रही होगी जिन्होंने टीपू सुल्तान से बचने के लिए ईस्लाम अपनाकर ग्राम ओवैस के नाम पर आस्पद ओवैसी अपनाया । अब ओवैसी टीपू सुल्तान से भी बढ़कर ग़ाजी और जिहादी बनने में लगे हैं । देवकीनन्...

वैदिक युग का अर्थ

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वैदिक युग का अर्थ By Vinay Jha ‘युग’ का अर्थ है वह काल जब दो वस्तुओ वा परिघटनाओं में परस्पर योग हो । वेद नित्य और अनादि है किन्तु प्रत्येक महाप्रलय और प्रलय के पश्चात उसका योग संसार से होता है,वे कालखण्ड ही वैदिक युग हैं । उन कालखण्डों के पश्चात कलियुग तक केवल वेद का धीरे धीरे संसार से लोप होता है जिस कारण संसार का ही अन्ततः लोप हो जाता है और वेद द्वारा पुनः सर्जना होती है —  तब पुनः वैदिक युग से हर चतुर्युगी महायुग का आरम्भ होता है । उस आरम्भ बिन्दु पर भी दैवी और आसुरी लोग होते हैं तथा देवभाषा एवं म्लेच्छभाषायें होती हैं । असुरों का उच्चवर्ग वैदिक विद्याओं को सीखकर उनका दुरुपयोग करता है । कलियुग में असुर ऐसा भी नहीं करते,वेद का विरोध करते हैं और उसकी विद्याओं को बिना समझे दबाते हैं । कई बार आर्य वंशों में भी कुछ लोग विद्या द्वारा शक्ति अर्जित करने के लोभ में असुर बन जाते हैं,जैसा कि देवकी के भाई कंस । यजुर्वेद के अन्तिम अध्याय ईशोपनिषद में विद्या की उपासना का फल नरक बताया गया है । उपासना केवल उपास्य की ही करनी चाहिये । आर्य और अनार्य में नस्लगत विभेद नस्लवादी अंग्रेजों...

न हूरें मिली न जन्नत

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परसों १२ मई को तमिलनाडु के तंजौर एयरबेस से भारतीय वायुसेना के टाइगर−शार्क्स स्क्वाड्रन के Su-30MKI सुखोई युद्धविमान ने हवा में ही ईंधन भराई और ब्रह्मोस−१ सुपरसोनिक मिसाइल के संवर्द्धित−परास (extended range) संस्करण को बंगाल की खाड़ी में ४५० किलोमीटर दूर के एक पूर्वनिर्धारित लक्ष्य तक सफलतापूर्वक छोड़ा । भारतीय रक्षा मन्त्रालय के प्रवक्ता ने बयान दिया — “It was the first launch of the Extended Range version of BrahMos missile from Su-30MKI aircraft. With this, the IAF has achieved the capability to carry out precision strikes from Su-30MKI aircraft against a land/sea target over very long ranges. The extended range capability of the missile coupled with the high performance of the Su-30MKI aircraft gives the IAF a strategic reach and allows it to dominate the future battlefields.” ब्रह्मोस−१ का प्रथम परीक्षण २००१ ई⋅ में हुआ था । यह २९० किलोमीटर की परास (range) का था । इसमें रूसी इञ्जन था जिस कारण परास २९० किलोमीटर तक ...

साम्प्रदायिक सौहार्द्र

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१९९१ ई⋅ के THE PLACES OF WORSHIP (SPECIAL PROVISIONS) ACT में एक संशोधन की आवश्यकता है — जिन पूजास्थलों में अन्य सम्प्रदायों के पूजास्थलों को नष्ट करके बनाने का प्रमाण मिले उनपर यह एक्ट लागू न हो । जहाँ कहीं ऐसा आरोप हो वहाँ सर्वेक्षण कराया जाय और मूल पूजास्थल का पुनरुद्धार हो । भाजपा सरकार पर दवाब डालेंगे तभी सम्भव है । प्राचीन मन्दिरों को तोड़कर जो मस्जिद बनाये गये थे उनकी सुरक्षा के लिए यह एक्ट बनाया गया था ताकि तोड़े गये प्राचीन मन्दिरों का पुनर्निर्माण न हो । अतः इस एक्ट की भावना असंवैधानिक  है एवं हिन्दू−विरोधी साम्प्रदायिक दुर्भावना से ग्रस्त है । संविधान में भी जब संशोधन हो सकता है तो संसद के एक गलत एक्ट में संशोधन क्यों नहीं हो सकता?संसद अपनी गलती सुधारे । वरना जनता संसद को सुधारे । १९९१ ई⋅ के उक्त एक्ट में संशोधन करायें । जितने सही पूजास्थल हैं केवल उनपर यह एक्ट लागू हो । गुण्डों द्वारा अतिक्रमित पूजास्थल को पूजास्थल नहीं माना जाय,बल्कि उन गुण्डों को दण्ड मिले । जिन आक्रान्ताओं ने मन्दिरों को तोड़ा उनके नाम पर एक भी नगर,ग्राम,सड़क वा भवन का नाम न रहे । १९९१ ई⋅ के ...

“बेगमी सभ्यता” — भाग २

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“बेगमी  सभ्यता” — भाग २ by Vinay Jha बिन ब्याही बेगम जहाँआरा जहाँआरा पर विश्व की अनेक भाषाओं में अनेक उपन्यास,फिल्म आदि बने,किन्तु किसी ने सच बताने का साहस नहीं किया । सब मुग़लों को महान सिद्ध करने के चक्कर में काल्पनिक कथायें गढ़ते रहें,जिनका तथ्यों और ऐतिहासिक दस्तावेजों से कोई सम्बन्ध नहीं था । पुरुषोत्तम नागेश ओक की पुस्तक ‘The Taj Mahal Is A Temple Palace’ में पृष्ठ १३१ पर मुमताज की १४ सन्तानों की सूची है,उसमें दूसरी सन्तान जहाँआरा के बारे में Keene's Handbook को उद्धृत करते हुए ओक साहब लिखते हैं —  “Jahanara, 1613 (में जन्म) - a daughter with whom later Shahjahan is reported to have developed illicit sexual relations.” जहाँआरा से शाहजहाँ के यौन सम्बन्ध की चर्चा पुरुषोत्तम नागेश ओक ने की । साक्ष्य मुगलकालीन फ्रांसीसी लेखक फ्राँस्वा बेर्नियर हैं जो १२ वर्षों तक औरंगजेब के आरम्भिक शासनकाल में दिल्ली और आगरा में रहे थे । बेर्नियर अपने यात्रा−वृतान्त के पृ⋅११ पर लिखते हैं — “Begum-Saheb, the elder daughter of Chah-Jehan, was very handsome, of lively par...

“बेगमी सभ्यता”

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“बेगमी  सभ्यता” By Vinay Jha ताजमहल पर बहस करने से पहले इतिहास की पुस्तकों में यह पढ़ाया जाना चाहिए कि मुमताज महल से शाहजहाँ को इतना इश्क था कि उसके मरने पर उससे उत्पन्न अपनी बेटी जहाँआरा को ही मुमताज महल का “बादशाह बेगम” पद देकर अपनी प्रमुख बेगम बना लिया!यद्यपि शाहजहाँ की आठ बेगमों में से तीन जीवित थीं । किन्तु शाहजहाँ को १७ वर्ष की बेटी जहाँआरा ही “बादशाह बेगम”  बनने योग्य लगी ! जहाँआरा दारा शिकोह की समर्थक थी और बाप को कैद किये जाने पर बाप के साथ रही । किन्तु बाप के मरने पर औरंगजेब से दोस्ती करके अपनी छोटी बहन रोशनआरा को हटाकर औरंगजेब की “बादशाह बेगम” बन गयी । जहाँआरा से पहले रोशनआरा “बादशाह बेगम” थी ।  उसके पश्चात औरंगजेब ने अपनी बेटी जीनत को अपनी “बादशाह बेगम” बनाया । बाद में मुगल बादशाह फर्रूखसियर ने भी अपनी ही बेटी को अपनी “बादशाह बेगम” बनाया! इतिहासनकारों का कहना है कि बादशाह की सभी बेगमों में अव्वल को “बादशाह बेगम” बनाया जाता था । किन्तु जब शाहजहाँ ने अपनी बेटी तथा औरंगजेब ने अपनी दो बहनों और बेटी को बारी−बारी से अपनी “बादशाह बेगम” बनाया तो इस शब्द का ...

ज्ञानवापी

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By Vinay Jha जाँच नहीं होने देंगे,क्योंकि शान्तिदूतों के संस्कृत−प्रेम का भाण्डा फूट जायगा?भवन तो मन्दिर का है ही,नाम भी संस्कृत में है — “ज्ञानवापी” । कभी संविधान और न्यायालय की दुहाई देंगे,तो कभी क़ुरान का । किन्तु क़ुरान ने संस्कृत में मस्जिद का नाम रखने का आदेश दिया था? औवेसी ने कुछ दिन पहले कहा कि गोमाँस खाना उनके मज़हब में है । अरब रेगिस्तान में लोग गाय रखते थे? क़ुरान को इतना ही मानते हो तो उसमें स्पष्ट आदेश है कि काफिरों के देश में मत रहो । प्रस्तुत है क़ुरान का उक्त आदेश जिसके अनुसार सारे मुसलमानों को भारत,फ्रांस,जर्मनी,अमरीका,चीन जैसे देशों से स्वतः निकलकर ईस्लामी देशों में चले जाना चाहिए । अरबी में क़ुरान की आयतें और मुल्ले द्वारा अंग्रेजी अनुवाद निम्न वेबसाइट पर है जिसका गूगल ट्रान्सलेट द्वारा अनुवाद प्रस्तुत है । गूगल ट्रान्सलेट द्वारा हिन्दी अनुवाद सन्तोषजनक तो नहीं होता किन्तु भावार्थ का पता चल जायगा । क़ुरान की इन आयतो का भाव यही है कि जिन देशों में गैर−मुस्लिमों का बोलबाला हो वहाँ से मुसलमानों को इस्लामी देशों में प्रवास करना चाहिए वरना नरक जाना पड़ेगा,केवल ...

मल्टीपोलर वर्ल्ड

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मल्टीपोलर वर्ल्ड By Vinay Jha रूस को अपने तेल गैस आदि के लिए चीन और भारत के बाजार मिल गये तो झेलेन्स्की की तरह गरजने वाले पोलैण्ड और बुल्गारिया को पेट्रोलियम आपूर्ति बन्द कर दी । भारत को भी समझ में आ गया कि नैटो रूस का कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा,तो रूसी टीवी पर प्रतिबन्ध हटा लिया । इतना ही नहीं,भारत सरकार ने आधिकारिक घोषणा कर दी कि भारत को क्या करना चाहिए यह बताने का अधिकार पश्चिमी देशों को नहीं है क्योंकि अब पुराना भारत नहीं रहा!विदेश मन्त्री ने यह नहीं बताया कि “पुराना भारत” से उनका तात्पर्य क्या था — मौनमोहन जी वाला पुराना भारत अथवा वीर जवाहर वाला पुराना भारत जो पेरिस में कोट वॉश कराते थे और लन्दन में ब्रेन वॉश ? सबसे मजेदार रुख तो असंयुक्त राष्ट्र के मोहासचिव का रहा,मास्को जाकर बोले हैं कि यूनीपोलर वर्ल्ड से वर्ल्ड को क्षति है ("We need a world that is multipolar" — ये शब्द RT पर मैंने उनके मुँह से सुने),अब मल्टीपोलर वर्ल्ड का युग है!इस बयान पर अमरीका बौखला गया है । अभी तक मोहासचिव जी बाइडेन के निजी सचिव की तरह बयानबाजी कर रहे थे,अचानक उनको ज्ञान प्राप्त हुआ कि रूस ...

स्कंदपुराण* में एक सुंदर *श्लोक* है👇

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*स्कंदपुराण* में एक सुंदर *श्लोक* है👇👇 *अश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम्* *न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्।* *कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च* *पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।।*  *अश्वत्थः* = *पीपल* (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)  *पिचुमन्दः* = *नीम* (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)  *न्यग्रोधः* = *वटवृक्ष* (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)  *चिञ्चिणी* = *इमली* (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)  *कपित्थः* = *कविट* (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)  *बिल्वः* = *बेल* (85% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)  *आमलकः* = *आवला* (74% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)  *आम्रः* = *आम* (70% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है) (उप्ति = पौधा लगाना)         *अर्थात्* - जो कोई इन वृक्षों के पौधो का रोपण करेगा, उनकी देखभाल करेगा उसे नरक के दर्शन नही करना पड़ेंगे।        इस सीख का अनुसरण न करने के कारण हमें आज इस परिस्थिति के स्वरूप में नरक के दर्शन हो रहे हैं।  अभी भी कुछ बिगड़ा नही है, हम अभी भी अपनी गलती सुधार सकते हैं। *औऱ*   ...

जातिप्रथा और जातिवाद: क्या धर्म की अनिवार्यता हर समाज की आवश्यकता नहीं है?

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जातिप्रथा और जातिवाद by Vinay Jha (दूसरे के पोस्ट पर मैं अपनी पाँच वर्ष पुरानी टिप्पणी को पृथक पोस्ट के रूप में यहाँ डाल रहा हूँ क्योंकि वहाँ मुट्ठी भर लोग यह टिप्पणी पढ़ पाये थे ।) 45000 शाखाओं में बंटे ईसाई जब एकता की ब्राह्मणवाद की भेदभाव की बात करते हैं तो धूर्तता भी छोटा शब्द लगता है। आरक्षण लैनै के लिये सभी नीची जाति मे सहजता के साथ स्वीकार कर लैगै, बस कोसना क्षत्रिय,और ब्राह्मणों को ही कौसना है I पूजा-पाठ, शादी-विवाह सभी धार्मिक कार्य में ब्राह्मण चाहिए, फिर भी ब्राह्मण को गाली देंगे । क्या धर्म की अनिवार्यता हर समाज की आवश्यकता नहीं है? जातिप्रथा और जातिवाद के बारे में अधिकांश लोग आजकल मैकॉलेपुत्रों के दुष्प्रचार से भ्रमित हैं | जातिप्रथा और जातिवाद परस्पर भिन्न परिघटनाएं हैं | जातीय आधार पर परस्पर वैमनस्य और एक दूसरे के अधिकारों का हनन "जातिवाद" है जो हिन्दुओं की दासता के युग में पनपा और अंग्रेजों ने सुनियोजित तरीके से इसे भड़काया | जातियों (और जनजातियों) का अस्तित्व जातिप्रथा है जो मूलतः कर्म पर आधारित वर्ण-व्यवस्था से ही निकली है और भारत के स्वर्णिम काल क...

हर कर्म का कर्म होता है

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।।हर कर्म का कर्म होता है।। By Deepak Parashar आज ब्राह्मण के अपने कर्म को त्याग कर लोभ में लिप्त होने और सही कर्म न करवाने की चर्चा लेख हर जगह जगह जगह पाए जाने लगे हैं।।तो अब अपना मत भी लिख दे रहा हूं सहमत या असहमत होना आपकी अपनी इच्छा पर निर्भर है।। जब कोई विप्र आपके घर आकर किसी कर्मकांड को करता है जिस किसी भी कार्य के निमित उसने पूजा या जो भी किया है उसकी सफलता के लिए आपकी मनोकामना के लिए और जो आपका  दोष विप्र ने अपने सर लिया है विप्र को बाद में भी पूजा पाठ हवन मंत्र जप करना होता है ये बज्र नियम है।। इसके बिना न आपका किया गया कार्य पूर्ण होता है न ही आप और विप्र दोनों दोष मुक्त होते हैं।। आजकल क्या चला हुआ है?? मेरे एक परम आदरणीय मेरे भगवान स्वरूप पंडित जी जो कि श्री काशी जी से विद्या अर्जित किए हुए हैं और तंत्र यंत्र मंत्र ज्योतिष कर्मकांड मारण मोहन उच्चाटन यहां तक कि भैरव तंत्र में भी पारंगत हैं।। वेद उपनिषद पुराण रामायण सभी को मनन धारण किए हुए हैं।। वो सभी कर्मकांड 15 सक पहले ही छोड़कर खेती से अपना जीवन यापन करते हैं और दो गऊ माता की सेवा करते हुए आर्थिक तंगी में ...

भगवान के विभिन्न नामों की व्युत्पत्तियों का कथन- महाभारत, उद्योग पर्व

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भगवान के विभिन्न नामों की व्युत्पत्तियों का कथन (Part-1)  महाभारत, उद्योग पर्व, अध्याय 69 अथवा 70  भगवान समस्त प्राणियों के निवास स्थान हैं तथा वे सब भूतों मे वास करते हैं, इसलिये ‘वसु’ हैं एवं देवताओं की उत्पत्ति के स्थान होने से और समस्त देवता उनमें वास करते हैं, इसलिये उन्हें ‘देव’ कहा जाता है। अतएव उनका नाम ‘वासुदेव’ है, ऐसा जानना चाहिये। बृहत अर्थात व्यापक होने के कारण वे ही ‘विष्‍णु’ कहलाते हैं। "वसनात् सर्वभूतानां वसु त्वाद् देवयोनितः। वासुदेवस् ततो वेद्यो बृहत्त्वाद् विष्णुरुच्यते ॥३॥" हे भारत! मौन, ध्‍यान और योग से उनका बोध अथवा साक्षात्कार होता है; इसलिये आप उन्हें ‘माधव’ समझें। मधु शब्द से प्रतिपादित पृथ्वी आदि सम्पूर्ण तत्त्वों के उत्पादन एवं अधिष्‍ठान होने के कारण भगवान् मधुसूदन को ‘मधुहा’ कहा गया है।  "मौनाद् ध्यनाच्च योगाच्च विद्दि भारत माधवम्। सर्व तत्त्व लयाच्चैव मधुहा मधुसूदनः ॥४॥" ‘कृष’ धातु , सत्ता अर्थ का वाचक है और ‘ण’ शब्द आनन्द अर्थ का बोध कराता है, इन दोनों भावों से युक्त होने के कारण नित्य आनन्दस्वरूप श्रीविष्‍णु ‘कृष्‍ण’ कहलाते...

सत्संग की महिमा

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★★★सत्संग की महिमा, पढ़े नारद की ये कथा- ★एक बार देवर्षि नारद भगवान विष्णु के पास गए और प्रणाम करते हुए बोले, “भगवान मुझे सत्संग की महिमा सुनाइये।” भगवान मुस्कराते हुए बोले, नारद! तुम यहां से आगे जाओ, वहां इमली के पेड़ पर एक रंगीन प्राणी मिलेगा। वह सत्संग की महिमा जानता है, वही तुम्हें भी समझाएगा भी। नारद जी खुशी-खुशी इमली के पेड़ के पास गए और गिरगिट से बातें करने लगे। उन्होंने गिरगिट से सत्संग की महिमा के बारे में पूछा। सवाल सुनते ही वह गिरगिट पेड़ से नीचे गिर गया और छटपटाते हुए प्राण छोड़ दिए। नारदजी आश्चर्यचकित होकर लौट आए और भगवान को सारा वृत्तांत सुनाया। भगवान ने मुस्कराते हुए कहा, इस बार तुम नगर के उस धनवान के घर जाओ और वहां जो तोता पिंजरे में दिखेगा, उसी से सत्संग की महिमा पूछ लेना। नारदजी क्षण भर में वहां पहुंच गए और तोते से सत्संग का महत्व पूछा। थोड़ी देर बाद ही तोते की आंखें बंद हो गईं और उसके भी प्राणपखेरू उड़ गए। इस बार तो नारद जी भी घबरा गए और दौड़े-दौड़े भगवान कृष्ण के पास पहुंचे! नारद जी कहा, भगवान यह क्या लीला है। क्या सत्संग का नाम सुनकर मरना ही सत्संग की म...

यही झूठी फोटो बहुत फैलाई है झूठो ने

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मिथक 1: क्या सरदार पटेल को गांधी एवं नेहरू जी ने पीएम नही बनने दिया ? देश का प्रथम चुनाव 1951-1952 के मध्य हुआ था। सरदार पटेल जी का निधन 15 दिसम्बर 1950 को ही हो गया था, तो क्या प्रधानमंत्री बनने के लिए कायरकर एवं हंगामा प्रसाद लुख़र्जी ने समर्थन किया था ? अब कांग्रेस अध्यक्ष बनने की वृतांत: मौलाना अबुल कलाम आजाद 1940-1946 तक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। 1946 में नया अध्यक्ष का चुनाव होना था। जिस चुनाव में 15 में से 13 प्रदेश कांग्रेस कमेटियों ने पटेल जी को एवं 2 कमेटियों ने आचार्य कृपलानी जी को अध्यक्ष बनने के लिए समर्थन किया था। लेकिन 2 सितंबर 1946 को अंतरिम सरकार यानी गवर्नर जनरल की एग्जीक्यूटिव कॉउंसिल में प० जवाहर लाल नेहरू उपाध्यक्ष (विदेश एवं राष्ट्रमंडल विभाग) एवं सदस्य सरदार बल्लभ भाई पटेल (गृह एवं संचार विभाग) बन गए जिसके कारण कांग्रेस संगठन के अध्यक्ष आचार्य कृपलानी बन गए। 1946 - 1948 तक आचार्य कृपलानी अध्यक्ष बने रहे। उसके बाद पट्टाभि सीतारमैया अध्यक्ष बने। 1940-1951 तक नेहरू या पटेल दोनों में से कोई कांग्रेस का अध्यक्ष नही रहा है। तो प्रिय अंग्रेजी दुहराहो व मुखविरो...

Bending It Like Bharatanatyam

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#DidYouKnow: Bending It Like Bharatanatyam Although there is no evidence of a linear evolution of Bharatanatyam over the last 2,000 years, Tamil and Sanskrit texts confirm its ancient roots. Scholars Dr. Kapila Vatsyayan and late Dr. V. Raghavan have traced the dance style to Ekaharya Lasyanga, a solo performance depicting themes of love and relationships, mentioned in the Sanskrit text Natyasastra (2BC-2AD). #IncredibleIndia PC: Ali Bagwan https://www.instagram.com/alibagwan_photography/

अपने धर्म के साथ‌ बेअदबी क्या हिंदुओं के ही नसीब में लिखी‌‌ हुई है?

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अपार वैदिक वाङ्मय, उपनिषद, पुराण, स्तुति, स्तोत्रों तथा असंख्य सहस्त्रनामावलियों को छोड़कर धर्म के व्यापारियों ने‌ चालाकी के ‌साथ सबसे सरल हनुमानचालीसा चुनी है।  लेकिन यह भी शायद किसी को ही शुद्ध कंठस्थ हो! सोशलमीडिया पर देखा गया है कि ऐसे अद्भुत प्राणी न वन्देमातरम् सुनाना जानते हैं, न राष्ट्रगान। इन्हें तो शायद संघ की ध्वजवंदना भी पूरी न‌ आती हो।  हिंदूधर्म के निजीकरण के उपरांत अब मदारी की तरह इसके मालिकान हनुमान जी को गली-गली ‌घुमा रहे‌ हैं। क्या तुलसीदास जी ने इसी काम के लिए हनुमान चालीसा रची थी?  ईसाई और मुसलमान तो छोड़िए ही, क्या अपना सिख‌-समाज भी किसी प्रोटेस्ट के लिए गुरुग्रंथ साहिब का चौराहे-चौराहे पाठ कर सकता है? अपने धर्म के साथ‌ बेअदबी क्या हिंदुओं के ही नसीब में लिखी‌‌ हुई है? जब मेरे शैशव में चैतन्यता का समावेश होने लगा वही‌ समय‌ था, पंडित नेहरू का देहावसान हुआ था। राजसत्ता में लालबहादुर शास्त्री, इंदिरा जी, जगजीवनराम, चंद्रभानु गुप्त, पंडित कमलापति त्रिपाठी जैसे राजनेता थे। विपक्ष में दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. बलराज मधोक, अटलबिहारी बाजपेई, जयप्रकाश ...