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104 का दम

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★ISRO का एक महत्वपूर्ण उपकरण PSLV-C-37 के सोलर पैनल में पॉवर उत्पादान ्तथा आंकड़े इकट्ठे करने के लिए महत्वपूर्ण उपकरण एवं चिप् इस्रैइल एवं यूरोप ने बनाए हैं, जो  रिमोट से नियंत्रित होने में सक्षम हैं. इन उपकरणों में पीजोइलेक्ट्रिक जैसी मूलभूत सिधान्तों पर अनुसंधान करके ही अत्याधुनिक चिप एवं अन्य क्रिटिकल उपकरण निर्मित होते हैं, लेकिन हमारे देश में मूलभूत सिद्धांत/भौतिकी पर कोई अनुसंधान नहीं होता. यहाँ हर प्रकार के अनुसन्धान के क्षेत्र में काफी विषमताएं हैं एवं क्षेत्र भी काफी सीमित हैं. ◆जानकारी के लिए देखें-  goo.gl/g5GX2w अतः हमारे देश के नीति-नियंताओं एवं सरकारों को उन देशों की ही शर्तों के अनुसार कार्य करना होता है. समाचारों में उन्ही पक्षों को दर्शाया जाता है, जिससे जनता को लगे कि हाँ, सरकारों ने उन संधियों से कुछ हासिल किया, लेकिन ये हासिल किन किन तरह के कीमतों पर हुआ, इसके बारे में किसी सरकार ने कुछ नहीं बताया. ऍफ़ डी आई से यहाँ आने वाली विदेशी कंपनियां कभी भी हमें अपना तकनीक नहीं देतीं हैं. हमारे देश के नेताओं ने नीति निर्धारण में अगर इन देशों की संधि शर्तों एवं अन्य ...

शिवलिंग के ऊपर लगाए जाने वाले आक्षेपों का खंडन

आक्षेप : क्या शिवलिंग घृणित नहीं है? किसी महिला के निजी अंग (योनि) पर रखे एक पुरुष के निजी अंग की पूजा महिलाओं द्वारा करना और उस पर दूध चढ़ाना! कितना अश्लील है! उत्तर : वास्तव में अश्लीलता तो तुम्हारे मन में है जो हर चीज में अश्लीलता खोजने को उतावला रहता है। खास तौर पर हिंदू प्रतीकों में, क्योंकि हिंदुओं को कोसने में तुम्हें वीडियो गेम खेलने से ज्यादा मज़ा आता है। शिव : शिव का अर्थ है कल्याण (सभी का)। दुनिया के किसी भी शब्दकोश में इसके लिए कोई समानांतर शब्द नहीं है। हिंदू सभी का कल्याण चाहते हैं। यही कारण है कि वे "ॐ नमः शिवाय" का जप करते हैं - जो सभी का कल्याण करता है, मैं उस परमपिता परमात्मा के समक्ष समर्पण करता हूँ। बिना किसी भेदभाव के, सभी के कल्याण की प्रार्थना हिन्दू धर्म के अतिरिक्त किसी अन्य विचारधारा में नहीं पाई जाती। लिंग: लिंग का अर्थ है चिन्ह। जैसे स्त्रीलिंग का अर्थ है कोई ऐसी वस्तु जो स्त्रीरूप में कल्पित की जा सके। अब वह एक वास्तविक महिला भी हो सकती है या कोई ऐसी वस्तु जो स्त्री रूप में सोची जा सके। उदाहरण के लिए, नदी, लता आदि। इसी तरह पुल्लिंग उसे कह...

अन्य सम्प्रदाय के धर्म-ग्रंथों में हिन्दू एक अवैध धर्म है, सेक्युलर लोग क्या इस सच से मुंह मोड़ चुके हैं?

अन्य सम्रदाय के धर्म-ग्रंथों में हिन्दू धर्म एक अवैध धर्म है, सेक्युलर लोग क्या इस सच जानते समझते हैं? सेक्युलर सोच के वाहक लोग, अपने आप को सत्य के पारखी बतलाते हैं, लेकिन इस सत्य से वाकिफ नहीं हैं कि धर्म क्या है और सत्य क्या है? इन सेक्युलर लोगों ने कभी अपने ही पुरातन धर्म ग्रंथों को पढने की चेष्टा नहीं कि, प्रचलित एवं मुट्ठी भर बिकाऊ विचारकों एवं लेखकों को पढ़कर मनगढ़ंत उल जलूल तर्क देते हैं, अपने सेक्युलर बनने को समर्थन दिलवाने के लिए. अपने सेक्युलर बनने से पहले एक बार अपना धर्म ग्रन्थ पढ़ कर तो देख लिया होता कि, आपसे शुरू होने वाली सोच के कारण आपका भविष्य किस और करवट लेगा. ऐसे लोगों को हिन्दू धर्म में अपने जन्म से नफरत है, तभी इस सत्य को अन्य मतावलंबियों में स्वीकार नहीं कर सकते हैं, की "हाँ, मैं हिन्दू हूँ. !!" क्या ये सेक्युलर इतने निर्बल हो गए है, कि अपनी पहचान तक छुपानी पड़ रही है?  सेकूलर अपने धर्म की रक्षा कर सकने में अक्षम हैं, इसी कारण से वे एक नए धर्म में मतांतरित हो चुके हैं, जिसका नाम सेकुलरिज्म है !!  कल को ऐसे कमजोर एवं डरपोक लोग, अपने माता-पिता के नाम तक...

"सर्वधर्मसमभाव" बकवास है जो सम्प्रदाय को धर्म समझने वाले आधुनिक मूर्खों ने गढ़ लिया है.

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ब्रह्मा, विष्णु, महेश में बड़ा कौन है?  . उत्तर :-- यदि आप सही उत्तर बता दें तो क्या वह शान्तिप्रिय शरीफ आपके बताये सबसे बड़े हिन्दू देवता की पूजा करने लगेगा ? आप भी जानते हैं कि ऐसा नहीं होगा | धर्मशास्त्र में आदेश है कि शास्त्र का सही अर्थ जानने के लिए शंका करना और उसका निवारण करना शास्त्रार्थ है | जिनकी नीयत में खोट है उनसे शास्त्रार्थ करने की मनाही है | उसका मुँह बन्द करने के लिए दाम-दण्ड-भेद की आवश्यकता पड़ेगी, साम की नहीं | ये "शान्तिप्रिय शरीफ" लोग शान्ति और तर्क की बात नहीं समझ पाते | प्रश्न पूछने वाले के मन में स्वयं कोई जिज्ञासा नहीं थी, केवल दूसरे का मुँह बन्द करवाने की इच्छा थी, अतः इतना ही उत्तर पर्याप्त है, जो "तोल-मोल" कर दिया गया है | कौन देवता बड़ा है इस प्रश्न का उत्तर मेरे पिछले लेखों में पहले से है जो इन महाशय ने नहीं पढ़ा है | ******* ******* ******* अहंकार ही छोटा बनाता है, जो वास्तव में बड़ा होता है उसे बड़प्पन का अहंकार नहीं होता |  अहंकार तीन प्रकार के होते हैं -- तामसिक, राजसिक और सात्विक |  तामसिक अहंकार काम-क्रोध-लोभ-मोह आदि पापों ...

#I_Support_Jallikattu

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जल्लीकट्टू के ऊपर बैन लगाने का साजिश इस तरह से है------ ◆(SCROLL Down for English). . 1) एक यूरोपियन समिति ने यूरोपियन दूध को ए ग्रेड का एवं भारतीय गायों के दूध को बी ग्रेड का डिक्लेअर किया था (वास्तव में ये उल्टा है). इस निर्णय से यहाँ के गायों के दूध के निर्यात पर नकारात्मक एवं यूरोपियन दूध के निर्यात पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा.  . 2) विदेशी दूध का भारत में आयात, शुरू में काफी कठिन था, क्यूंकि, लगभग सभी गावों में लोगों के यहाँ गायें होतीं थीं, जिससे दूध की आवश्यकता पूरी हो जातीं थीं. जिससे, कि कोआपरेटिव मिल्क डेपो तक दूध पहुँचाया जाता था, जहाँ से कि ये दूध सरकारी एजेंसीज एवं प्राइवेट मिल्क विक्रेताओं तक पहुच जाता था. . 3) गांवों में गायों की उच्च नस्लों को बनाए रखने एवं उनके संवर्धन के लिए, इनकी ब्रीडिंग उच्च गुणवत्ता वाले बुल्स से कराए जाते हैं, जिसके लिए, jallikattu खेल का आयोजन होता था.  . 4) बुल्स को मजबूत एवं स्वस्थ बनाने के लिए, इन्हें, उच्च गुणवत्ता वाले खाद्यान्नों को खिलाया जाता था, जिसके लिए धन की आवश्यकता होती थी. बुल्स के मालिक , इसके लिए गां...

देश के टुकड़े होने के समर्थकों को मार डालना चाहिए !!

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क्या खालिस्तान की डिमांड करने वाले लोगों, युवाओं,पार्टी के लोगों का कूच कूच कर कत्ल नही किया जाना चाहिए? बिलकुल !! ये मेरा उत्तर है !! ऐसा ही, अन्य हिस्से मांगने वालों के प्रति होना चाहिए !! आम आदमी पार्टी अलगाववादी है, लेकिन पढ़े लिखे कि नजर में वो देशभक्त पार्टी है, अगर कोई राष्ट्रीय एक जुटता की बात करे तो देशद्रोही !! . इसका सीधा सा मतलब है कि उनका देश कोई अन्य देश है, जो विश्व-माफिया से समर्थित है , ना कि यहाँ, जहाँ से ये उपजे हैं !! इन लोगों को तो कीलों में चुभा कर मार ड ाला जाना चाहिए . . अब आगे पढ़िए कि wahan akhir क्या चल रहा है. मैंने पंजाब में अपनी आंखों से जो देखा, वह मुझे अंदर तक डरा गया! सिख भाई आगामी चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग सोच-समझ कर करें! अभी कुछ समय पूर्व मैं पंजाब गया था। अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के पास की दुकानों पर भिंडरावाले की तस्वीर वाली टी-शर्ट धड़ल्ले से बिकता देख बहुत आश्चर्य हुआ! जिसने पंजाब को आतंकवाद की आग में झोंका, उस भिंडरावाले की तस्वीर वाली टी शर्ट वहां के सिख युवाओं को पहने देखकर बड़ा डर लगा! पत्रकरिता का दिमाग था, बिना पूछताछ किए कैसे रह ...

वर्ण व्यवस्था कर्मगत है जन्मगत नहीं, ये ऋग्वेद का पुरुष-सूक्त बतलाता है !!

ऋग्वेद के पुरुषसूक्त में, परम पुरुष के चरणों से शूद्रों, जाँघों से वैश्य, भुजाओं से क्षत्रिय एवं मुख से ब्राह्मण को उत्पन्न बताया गया है. इसी तरह से उसी विराट पुरुष के मस्तक से द्यू लोक, नाभि से आकाश एवं चरण से इस पृथ्वी लोक कि उत्पत्ति हुई है. . इन श्लोकों का ये मतलब नही बताया गया है कि, कोई वर्ण उच्च हुआ और कोई वर्ण निम्न हुआ, अगर मनुष्यों के उच्च-नीच की लोलुपता इस दुनिया में मानी ही जानी होती तो पृथ्वी भी अछूत मानी जानी चाहिए. . ये उंच नीच का जन्म मनुष्यों से अपने स्वार्थ-सिद्धि के लिए किया है. न कि भगवान ने उन्हें जन्मसिद्ध अधिकार दिया है. इन श्लोकों के बाद सभी वर्णों का कर्तव्य भी बताया है, लेकिन इन्हें जानने से पहले ही मानव अपने स्वार्थ-सिद्धि और स्वार्थ पूर्ती में ऐसा उलझा कि पुरुष सूक्त एवं इसके बाद के श्लोकों का कोई मतलब ही नही है. . भगवान ने भी सोचा होगा कि किसे उपदेश दे दिया !! भगवद्गीता के तीसरे अध्याय में कर्मयोग एवं चौथे अध्याय तथा १६-१८ अध्याय तक सभी तरह के मानवों के कर्मों, गुणों, सभी वर्णों के बारे में एवं कर्मयोग के बारे में बताया है, कहीं पे भी जन्म आधारित आजीवि...

भविष्य पुराण में महा-मद नाम के व्यक्ति के बारे में कुछ बताया है !! पैशाचिक धर्म की स्थापना या धर्म की स्थापना?

हमारे भविष्य पुराण में शुरूआती अध्याय में भविष्यवाणी की गयी है महा-मद नाम के व्यक्ति के बारे में, स्थान पता सब लिखा हुआ है. ये व्यक्ति इस धरती पे पैशाचिक धर्म की स्थापना करेगा, जिसके बारे में सब कुछ ठीक वैसे ही जैसा रहन सहन मुस्लिमो के तरह है, अर्थात महा-मद मतलब महा-मतलबी धर्म एवं कृत्यों की स्थापना करने वाला. इसका वर्णन का मतलब ये थोडा ही न हुआ कि महा-मद कोई भगवान है !! . इसको अजीब अजीब नाम दिया है भविष्य पुराण में. लिंगो-च्छेदी इत्यादि. महा-मद अर्थात - मजबूत लीक में हाथी, अत्यधिक या हिंसक लीक, मादकता and नशा. इसका जन्म-कुंडली भी यही बताता है. आप किसी एक्सपर्ट पंडित को पूछियेगा. . कई शांतिप्रिय विशेष लोग इस पक्ष में मजबूत एवं दृढ विचारधारा के हैं कि नहीं, इन लोगों में तो कई अच्छी बातें भी हैं, लेकिन, सौ में पांच बात जनता की भलाई के लिए हों तो, वो धर्म नहीं माना जा सकता. अधिकतर कुरआन का उद्धरण देने वाले झूठ बोलते हैं, क्यूंकि पुराण एवं वेद में कभी n झूठ का सहारा लिया गया है और n इसे कहीं पे सराहा गया है. बलि प्रथा का भी अन्य मतलब है, आज के बलि की तरह नही है. खैर.... प्रथ्वी पे अप...