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वामपंथियों के लिए धर्म नशे की गोली मात्र है, इनके लिए धर्म अफीम है.

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इस लेख में घटना का मुख्य-अंश Krishna Dharasurkar जी के वाल से लिया गया है, लेकिन मुद्दा भ्रष्टों को अपदस्थ करने का भय देकर इमानदारी-पूर्ण कार्य करने का प्रशासनिक व्यवस्था का मांग है, अतः यहाँ मुख्य अंश कॉपी किया गया है. . किसी धार्मिक त्यौहार के अवसर पर जनता को बधाई और शुभकामनाएं देना राजनेताओं के लिए एक आम बात है। हाल ही में केरल के ओणम त्यौहार के लिए अमित शाह ने बधाई संदेश जारी किया था, जिसमें वामन जयंती का भी जिक्र था। . वामिस्लामी फितरत का एक स्पष्ट उदाहरण देखिए। यह व्यक्ति एक वामपंथी नेता, और केरल का मुख्यमंत्री है। आधिकारिक तौर पर नास्तिक है। इसके लिए धर्म एक नशे की गोली मात्र है। . केरल की निधर्मी वामपंथी सरकार एक तरफ सारे प्रयास कर रही है कि ओणम के उत्साह को किस तरह से कम किया जा सकता है। सरकार ने आधिकारिक परिपत्र जारी कर सरकारी कार्यालयों में ओणम मनाने पर प्रतिबंध लगाया है, जिसकी आम केरलीय जनता ने घोर भर्त्सना की है। जनता इस हिन्दू धार्मिक त्यौहार के प्रति कैसे निरुत्साही रहे इसके सारे प्रयास सरकार कर रही है। . यहाँ आप ध्यान दीजिए, नास्तिक विचारधारा का राजनेता, धार्मिक त्...

तीसरे विश्व युद्ध के लिए भारत कितना तैयार है?

ईरान, सीरिया, अमेरिका, पाकिस्तान, भारत, चीन, उत्तर कोरिया, टर्की एवं अन्य कुछ देश तीसरे विश्व-युद्ध की शुरुआत करेंगे. इसमें रूस बाद में भाग लेगा. . यहाँ मुख्य प्रश्न ये है की भारत इसके लिए कितना तैयार है? हमारे नेताओं को बबूल के झाड पे चढा कर वोट बैंक की राजनीति करवाकर, अपने भक्तों का भगवान बनाने का काम मीडिया जिस तरह से करती है ना, वो सब के लिए काफी घातक सिद्ध होगा. . कोई भी देश, किसीभी समझौते के अंतर्गत किसी अन्य देश को अपने देश की अत्याधुनिक तकनीक नहीं देता, ये बात आपको मीडिया नहीं बताएगी क्योंकि वो वही छापती है एवं दिखाती है, जिसके लिए उसे पैसे मिले होते हैं, वे किसी तकनिकी एक्सपर्ट से पूछते नहीं है की जो तकनीक कोई भी देश हमें दे रहा है, वो कितना अत्याधुनिक है. बड़ी हथियार निर्माता कंपनियों के मालिक जो महा-कारपोरेशन वाले हैं, वे कोई सत्संग नहीं बांचते हैं, की आपको अपनी तकनीक इतनी आसानी से दे देंगे, क्योंकि इससे उनका व्यापार नहीं चलने वाला. . भारत जैसे देश को उन आयातित तकनीक को एन चुनौती की तरह लेना चाहिए, कि उन देशों के पास और भी कितनी ही महा-विकसित तकनिकी युक्त हथियार सामाग्री एव...

सूक्ष्म शरीर में सब कुछ चीरंजिवी ही है

सूक्ष्म शरीर में दुनिया का हर व्यक्ति है. जब भी कोई चीज़ दृश्यमान सत्ता से उस पार होजाए, तो उसे सूक्ष्म कहा जाता है.  इस सूक्ष्म में ब्रम्हांड में हर कुछ घटित होता रहता है, जिसे चर्म चक्षुओं से दृष्टिगोचर नहीं होता.  कितने तरह की तरंगे चारों और घूम रहीं हैं, आप उन्हें नहीं देख पाते. ये सब कुछ सूक्ष्म कही जाती है. . इसीलिए जो भी सदेह नहीं हैं, वे सभी सूक्ष्म है. सूक्ष्म शरीर में सब कुछ चीरंजिवी ही है. . आत्मा को सर्व-व्यापक कहा गया है. सब गुणों को धारण करने वाला कहा गया है और ये आत्मा चेतना को धारण किये हुए होती है. व्यापक का अर्थ है कि ये सर्वत्र सामान रूप से फैला हुआ है. . शरीर में आत्मा किसी एक जगह पर नहीं है, ये शरीर को संचालित करतीहै. मष्तिष्क के भीतर जहाँ शिव-बिंदु होता है, उस बिंदु में आत्मा का वास होता हा ना की ह्रदय चक्र में. इस शिव-बिंदु को ह्रदय गुहा भी कहा जाता है, जो भ्रम उत्पन्न करता है. लोग समझते हैं की ह्रदय चक्र में आत्मा का वास होता है. इसे गुहा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि वहां पर कुछ भावनाएं उत्पन्न होने लगतीं हैं, जिन्हें नवरस कहा जाता है, जबकि योगी अपनी आध्य...

हिंदुओं का सत्यानाश कैसे हुआ, क्या कारण हैं एवं समाधान क्या क्या हैं जिसे सारे हिन्दू को करना चाहिए ?

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न न, ये मत सोचें की आपको कोई अनुष्ठान इत्यादि करने को बोला जा रहा है. एक कारण है, धर्म का ज्ञान समग्र रूप से ना होना एवं धर्मसंकट के समय बड़े धर्म के रक्षा के लिए छोटे धर्म का त्याग करना उससे भी बड़ा धर्म है. ये बात सभी हिन्दुओं को मालूम नहीं है. इसीलिए देश की रक्षा करने के स्थान पर दुश्मनों द्वारा सामने से दौडाई हुई गायों का वध करना उचित न समझा गया. इसी तरह, आज हिन्दू-मंदिरों से सोने एवं धन की लूट को अधिकतर हिन्दू समर्थन दिए हुए हैं, उनमे से किसी को ये मालूम नही होगा की उन धन एवं सोने को देश के लिए उपयोग में लाया जाएगा या नहीं? . 1200 वर्षों से भारत भूमि विदेशी आक्रान्तों को झेलती आ रही है। पहले इस्लामिक आक्रमणकारी आये फिर अंग्रेज आये। कहने को 1947 में हमारा देश स्वतंत्र हुआ मगर तब तक अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल, तिब्बत, बांग्लादेश, म्यंनमार, श्री लंका आदि भारत भूमि से अलग हो चुके थे। यह जगजाहिर है कि भारत में हिंदुओं की आज भी वैसी ही दुर्दशा है जैसी मुग़लों और अंग्रेजों के राज में थी। सत्ता में कोई भी दल क्यों न हो। हिन्दू हितों की अनदेखी सदा होती आयी है। आज भी गौ माता कसाई खानो...

सामान्य नागरिकों को हथियार-विहीन रखने के एक और उपाय

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देख लो भाइयों, बहनों, बंधुओं, सामान्य नागरिकों को हथियार-विहीन रखने के अंग्रेजो के समय के बने एक्ट के तहत ही, इस तरह के क़ानून सब पर थोपे जा रहे हैं, जिससे हम संकट के समय अपनी रक्षा ही न कर सकें एवं चोर-उचक्के, लूट इत्यादि के डर से जनता का मनोबल इतना गिरा दिया जाए की वो अत्याचार एवं लूट के विरुद्ध कुछ बोल न पाए.  आप जानते हैं, कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, कि आपका मनोबल तोड़ने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं? . 1. हथियार विहीन देश को युद्ध/आतंकवाद की धमकी देकर FDI के लिए अनुमति ली जाती है । . 2. स्वीकार्यता बनाए रखने के लिए पेड मिडिया, पेड कोल्मिस्ट, पेड पीएम आदि के माध्यम से FDI को विकास से जोड़ा जाता है । . 3. MNCs कर मुक्त मुनाफा कमाकर मिशनरीज़ को अनुदान देती है । . 4. मिशनरीज़ इस अनुदान से आदिवासी और पिछड़े इलाको में स्कूल, अस्पताल और चर्च खोलकर परोपकार के कार्य करती है । . 5. मुफ्त दवाइयां, मुफ्त शिक्षा तथा समानता के व्यवहार के बल पर धीमी गति से धर्मान्तार किये जाते है । . 6. पिछड़े और आदिवासी इलाको में सरकारी स्कूलों और अस्पतालों को बदहाल बनाए रखने के लिए सम्बंधित मंत्रियों/नौकरशाहो ...

भागवत उवाच-

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मैं नहीं, भागवत उवाच-  .  संघ के सरसंघ संचालक मोहन जी भागवत द्वारा 'हिन्दू धर्म में व्याप्त अवैज्ञानिक परम्पराओ को त्यागने करने की सलाह' >>>>  http://satyavijayi.com/hindu-values-that-have-no-scientifi …/ .  सभी संघ के सेवक (जो कि खुद स्वयं सेवक कहते है) ने इन सभी अवैज्ञानिक परम्पराओ को त्यागने का संकल्प लिया है। तथा वे अन्य हिन्दू धर्मावलम्बियों को भी कन्विंस कर रहे है कि वे कुरूतियों को त्याग दे।  . अब हिन्दू धर्म में क्या अवैज्ञानिक है और क्या अवैज्ञानिक है इसका लाइसेंस आरएसएस / विहिप के पास है।  .  हिन्दू धर्म इतना विस्तृत है की ओडिसा से राजस्थान और कश्मीर मेघालय से लेकर तमिल नाडु तक विभिन्न परम्पराएँ हैं , उनमे किसी भी हिन्दू को कोई आपत्ति नहीं है। कोई भी सम्प्रदाय / व्यक्ति अपनी परम्पराओं के वैज्ञानिक अथवा अवैज्ञानिक होने के पचड़े में नहीं पड़ता। सभी शांति से ख़ुशी से रहते हैं। तो ऐसे में आरएसएस / भागवत को विज्ञान की शिक्षा पोप ने दी या ब्रिटिश क्वीन ने या अमेरिकन ओबामा ने ??? ये तो समय ही बताएगा, वैसे ही जैसे 2 साल में मोदीजी की हकी...

केवल प्रतिबन्ध लगाने से गो-हत्या नहीं रूकती |

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एक बहुत ही भ्रामक शीर्षक वाला लेख आजकल में मीडिया में घूम रहा कि मोदी सरकार ने "बीफ" के निर्यात को बैन कर दिया | ये है उसका लिंक -  http://thenamopatrika.com/big -news-modi-govt-bans-beef-exp…/ पहले तो ये समझ लीजिए कि "बीफ" में केवल गाय और बैल और उनका बछड़ा नहीं, भैंस प्रजाति के जानवर भी आ जाते हैं | और हमारे देश से वैध तरीके से भैंस के मॉस का निर्यात बढ़ ही रहा है, कम नहीं हो रहा | अब अंध भक्त इतने अंधे हैं कि उस लेख में दिए गए चिट्ठी को भी नहीं पढ़ना चाहते (जो अंग्रेजी में है) और जिसमें लिखा है कि गो-हत्या पर बैन लगाना राज्य सरकार के अधीन है, न कि केन्द्र सरकार के अधीन | और गो-मांस के निर्यात पर बैन तो काफी सालों से लगा हुआ है - ये बात पत्र में स्पष्ट नहीं बताई गयी है | और सबसे बड़ी बात कि सोशियल मीडिया और अन्य स्रोतों से पता चल सकता है कि अवैध तरीके से गाय-बैल की चोरी और गो-मांस और गो-चमड़े की चोरी में भी कमी नहीं आई है | क्यों ? केवल प्रतिबन्ध लगाने से गो-हत्या नहीं रूकती | क्योंकि आज यदि किसी के पास गोहत्या करने वाले के विरुद्ध सबूत है और वो सबूत ...