हिंदुत्व और देवदासी प्रथा का सच



हिन्दू धर्म जितना विराट सिस्टम तो किसी भी अन्य धर्म में कभी हो ही नही सकता.
इन्टरनेट पर जिस तरह से देवदासियों के इतिहास को सेक्सुअल मोड़ देकर समाचार और स्लाइड्स इन्टरनेट पर रचा गया है, वो पूर्णतया सच नही है.
ये मैं इस आधार पर कह सकती हूँ की महाराष्ट्र के किन्नर समुदाय के लोगों से मैंने काफी बातें कीं हैं.
वे लोग बचपन में किन्नर उत्पन्न होने के चलते माँ-बाप द्वारा घर से निर्वासित कर दिए गए जिन्हें मंदिरों में शरण दिया गया था.
इनमे से जो लड़की किन्नर थीं, उसकी शादी भगवान के विग्रह से की जाती है....वे आजीवन भगवान को पति मानतीं हैं. हाँ लेकिन बड़े होने पर चाहे तो लिंग-परिवर्तन कर अन्य लोगों की तरह भी जीवन जीने वाले भी हैं, काफी कम संख्या में.
मंदिरों में ये किन्नर वहां होने वाले उत्सवों में नाच गाकर धनोपार्जन करते हैं, मंदिरों में धर्मार्थ सेवा दान करते हैं, क्योंकि आम सभ्य हिन्दुओं का समाज तो किन्नरों को साधारण शिक्षा व्यवस्था तो क्या, घरों में घुसने तक नही देते....
अपने साथ इस संसार द्वारा तिरस्कृत होने के कारणों से वे अन्य मानवीकृत शिक्षा व्यवस्था के साथ कभी सहयोग नहीं कर सकते, और वे क्यूँ करें?
अपने ही घृणित सच को स्वीकार करना बड़े कलेजे का कार्य होता है.
सामाजिक रूप से त्यक्त महिलाएं भी कुछ मंदिरों में शरण लिए हुए रहतीं हैं, लेकिन वे किन्नरों की तरह हर समय वहां नहीं रहतीं.
इस तरह से खाए अघाए काम पीड़ित मानसिक नपुंसक, मूर्ख एवं भ्रष्ट हिन्दु आज विदेशियों द्वारा पढाये जा रहे इतिहास का साथ देकर, एक तरह से दानवों के ही आदमी बन चुके हैं, जिन्हें अपने सनातन धर्म के विराट स्वरुप से कोई मतलब नही....
इन मूर्खों को अपने गिरे हुए सत्य देखने की हिम्मत ही नही है..
वस्तुतः देखा जाय तो हिन्दू धर्म जितना विराट सिस्टम तो किसी भी अन्य धर्म में कभी हो ही नही सकता.

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