क्षद्म हिंदूवादी लोग बिना कोई रास्ता अपनाए, केवल बहस में समय बर्बाद करते हैं.

हिंदुवादियों को बीके हुए evm का विरोध तो होता नहीं है, इन्केलिये हिंदुत्व का अभी तक कोई रूप-रेखा भी तैयार नहीं हुआ...ना ही इन लोगों ने इससे सम्बंधित सभी ग्रन्थ को पढ़ा है......इनके लिए हिंदुत्व उतना ही है, जितना कि इनके राजीव=दीक्षित जी बताया हुआ है.....
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ये लोग बचकाने लोग हैं, उम्र कितनी भी हो....
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ये कूदेंगे..कि हम ये क़ानून बंद करवा देंगे...वह क़ानून बंद करवा देने....लेकिन कैसे करेंगे...इनको ये भी नहीं मालूम अभी तक....
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जो कानून सुधार का प्रयास कर रहे हैं....उनसे ही इन ्हिन्दुवादियों को समस्या है....
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दरअसल ऐसे सभी लोग, हिंदुत्व हिंदुत्व करके कहीं किसी एक पॉइंट पर कभी नहीं पहुंचेंगे....क्योंकि इनके पास कोई विधि ही तैयार नहीं है....ऐसे लोग क्षद्म हिंदूवादी है एवं इनसे बात करके लोगों का समय बिगड़ता है....

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कानूनों से फर्क पङता है. किसी देश की अर्थव्यवस्था कैसी है जानना हो तो पता लगाओ की उस देश की न्याय प्रणाली कैसी है. देश में आर्थिक सामाजिक विकास तब तक नहीं हो सकता जब तक कि आतंरिक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी न हो.
राजनैतिक, आर्थिक, सामरिक-क्षमता में, अगर कोई देश अन्य देशों पर निर्भर रहता है तो उस देश का धर्म, न्याय, संस्कृति, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, अनुसंधान व जनता तथा प्राकृतिक संसाधन कुछ भी सुरक्षित नहीं रह जाता.
वही राष्ट्र सेक्युलर होता है, जो अन्य देशों पर हर हाल में निर्भर हो.