Posts

गुटबाजी द्वारा नागरिक विदेशी धनपशुओं की इच्छाएं पूरी कर रहे हैं. भला नागरिक क्या करें ?

Image
 वो देखो ! पेशवा के सिपाही जा रहे हैं !! दंगा फ़ैलाने वाले और उन्हें रचने वाले उन्मादी तुम्हें हजारों साल पहले ले के जायेंगे !! उसका सिला वर्तमान में तुम्हारे द्वारा युद्ध करना और मर-खप जाना है !! दलितों और आदिवासियों का सबसे ज्यादा शोषण तो अंग्रेज़ो के criminal tribe act 1871 ने किया जिसे सन १९४९ में पूरे भारत में लागू किया गया. इसके बारे में तो दलितों के मसीहाओ को मालूम ही नही होगा. अधिक जानकारी के लिए  देखें-   http://ccnmtl.columbia.edu/projects/mmt/ambedkar/web/readings/Simhadri.pdf दंगे रचने वालों के लिए तुम्हारी कोई जरूरत नहीं है !!  महाराष्ट्र बन्द के दौरान हिंसा, आगजनी, सरकारी बसों और ट्रेनो पर पत्थरबाजी के फोटो और वीडियो तो काफी संख्या में इन्टरनेट पर उपलब्ध हैं ही,  गरीब, शोषित, दलितों के नाम के पीछे वो कौन सी आसामाजिक ताकतें थी जिन्होने गरीब खोमचों वालों एवं दूकान व्यवसाय वालों की जीविका ही उजाड़ दी..! क्या दंगाइयों को ये मालूम है कि जिनकी आजीविका उजाड़ दी गयी एवं जिन निरपराध लोगों को तमाम तरह का नुक्सान इस आन्दोलन में हुआ,...

राजिव भाई का राईट टू रिकॉल पर सबसे महत्त्वपूर्ण सन्देश

Image
  राजिव भाई का सबसे महत्त्वपूर्ण सन्देश : . https://www.youtube.com/watch?v=EywTrIr3-Mc .   प्रश्नकर्ता : राईट टू रिकॉल पर आपका क्या कहना है ? .राजीव भाई : राईट टू रिकॉल होना चाहिए। होना चाहिए। किन्तु इसके लिए “मौजूदा व्यवस्था” को बदलना होगा। .   प्रश्नकर्ता : कुछ लोग कुतर्क देते है कि “व्यवस्था परिवर्तन” कैसे किया जा सकता है ? मतलब क्या पद्धति से “व्यवस्था परिवर्तन” किया जा सकता है ? राजिव भाई : सबसे आसान पद्धति होती है “लॉ चेंज करना”। क्योंकि जो भी “व्यवस्था” जो चलती है न वो “लॉ पर बेस्ड” होती है। कोई क़ानून होता है वह ही सिस्टम को बनाता है। “तो आप क़ानून चेंज करे तो सिस्टम चेंज होगा”। जैसे इनकम टेक्स का क़ानून है। उसने एक सिस्टम बनाया है। आप इनकम टेक्स रिपील कर दो “सिस्टम चेंज” हो जाएगा। सबसे सिम्पल तरीका है “सिस्टम बदलने” का — “लॉ बदलना”। . यदि आपके सम्पर्क में कोई राजिव भाई का समर्थक है तो उन्हें यह वीडियो अवश्य दिखाए। . =========================== .     संस्मरण . राजिव भाई के सन्देश वाहक को 1991 या शायद 1992 में सुना था। हमारे सरकारी स्कूल की प्रार्थना...