गुटबाजी द्वारा नागरिक विदेशी धनपशुओं की इच्छाएं पूरी कर रहे हैं. भला नागरिक क्या करें ?
वो देखो ! पेशवा के सिपाही जा रहे हैं !! दंगा फ़ैलाने वाले और उन्हें रचने वाले उन्मादी तुम्हें हजारों साल पहले ले के जायेंगे !! उसका सिला वर्तमान में तुम्हारे द्वारा युद्ध करना और मर-खप जाना है !! दलितों और आदिवासियों का सबसे ज्यादा शोषण तो अंग्रेज़ो के criminal tribe act 1871 ने किया जिसे सन १९४९ में पूरे भारत में लागू किया गया. इसके बारे में तो दलितों के मसीहाओ को मालूम ही नही होगा. अधिक जानकारी के लिए देखें- http://ccnmtl.columbia.edu/projects/mmt/ambedkar/web/readings/Simhadri.pdf दंगे रचने वालों के लिए तुम्हारी कोई जरूरत नहीं है !! महाराष्ट्र बन्द के दौरान हिंसा, आगजनी, सरकारी बसों और ट्रेनो पर पत्थरबाजी के फोटो और वीडियो तो काफी संख्या में इन्टरनेट पर उपलब्ध हैं ही, गरीब, शोषित, दलितों के नाम के पीछे वो कौन सी आसामाजिक ताकतें थी जिन्होने गरीब खोमचों वालों एवं दूकान व्यवसाय वालों की जीविका ही उजाड़ दी..! क्या दंगाइयों को ये मालूम है कि जिनकी आजीविका उजाड़ दी गयी एवं जिन निरपराध लोगों को तमाम तरह का नुक्सान इस आन्दोलन में हुआ,...